
सत्य को न जानना आसान है न ही उसे पहचानना आसान है। पर सत्य की खोज करते रहे हैं बर्षों से । खोज अब भी जारी है।और ऐसा भी नहीं की वह लोगों को मिला न हो। मिला न होता तो कह भी कैसे पाते किसत्य यह है.जिन्होंने जाना और पाया वे कह तो पाए पर वे भी पूरा कहाँ कह पाए हैं। हाँ आभास तो दिया है और बहुत साफ साफ दिया है। वही टिमटिमाता रोशिनी का बिंदु है जो उस तरफ ले चलता है।
तो आइये चलते हैं हम भी अपने अपने टुकड़े टुकड़े ,बिखरे बिखरे तथ्यों के सहारे सत्य को प्रकाशित करने और उसे कोई आकर देकर ढालने.



0 comments:
एक टिप्पणी भेजें